शहादत

1.
किस वक्त में कब क्या हो जाये,
इसको किसने कब जाना है;
रक्षक पर जब भी विपदा हो,तो
बस बदला लेने को ठाना है।
2.
हे नेता तुम क्या समझोगे,
उन बेटे के टूटे सपनो को;
उस माँ की ममता बिलख उठी,
अपने बेटे से मिलने को।।
3.
शहीद हुऐ मेरे सैनिक,
माँ भारती के रक्षा में,
भाग्य में लिखा है किसके क्या,
ग्रह किसके हैं किस कक्षा में।।
4.
ऐ मालिक मेरी अरज सुनो,
इतना तो करम अब कर डालो;
जिसने भी अचानक वार किया,
उन सबकी दुनिया बदल डालो।।

*शैलेश मिश्रा (शैलू)*
*silenty*

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मैखाना

कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का
आँख साकी की उठे नाम हो पैमाने का।

गर्मी-ए-शमा का अफ़साना सुनाने वालों
रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का।

चश्म-ए-साकी मुझे हर गाम पे याद आती है,
रास्ता भूल न जाऊँ कहीं मैख़ाने का।

अब तो हर शाम गुज़रती है उसी कूचे में
ये नतीजा हुआ ना से तेरे समझाने का।

मंज़िल-ए-ग़म से गुज़रना तो है आसाँ ‘इक़बाल’
इश्क है नाम ख़ुद अपने से गुज़र जाने का।

लालसा

चेहरा देखने की तलब आज भी रहती है उसे,
झरोखों से झाँकते हुऐ आज मैने पाया उसे!
नाम लेता है कोई जब भी मेरा उसके आस पास,
सामने से दौङकर निकलते मैने पाया उसे!!
Pearl

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